Reliance Home Finance Share : अनिल अंबानी के ग्रुप की कंपनी रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) का शेयर कभी ₹100 से ऊपर उड़ान भरता था, लेकिन आज यह धरातल से भी नीचे आ गिरा है। कभी निवेशकों का चहेता रहा यह स्टॉक अब दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी की बदहाली की कहानी कह रहा है। बुधवार को इसमें करीब 5% की गिरावट दर्ज हुई और यह महज ₹4.16 पर बंद हुआ।
रिलायंस होम फाइनेंस (Reliance Home Finance) को कभी हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में एक बड़ा खिलाड़ी माना जाता था, लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट गए हैं। जिस कंपनी के शेयर कभी ₹100 से ऊपर कारोबार करते थे, वही अब ₹5 से भी नीचे गिर चुके हैं और कंपनी Insolvency Process (CIRP) से गुजर रही है। ताज़ा कारोबार में यह शेयर 4.81% की गिरावट के साथ ₹4.16 पर बंद हुआ।
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रिलायंस होम फाइनेंस की मौजूदा स्थिति
रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), जो अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप का हिस्सा है, लंबे समय से कर्ज संकट में फंसी हुई है। बढ़ते लोन और भुगतान में चूक के चलते कंपनी अब NCLT Mumbai Bench के अधीन जा चुकी है। कोर्ट ने हाल ही में इन्वेंट एसेट्स सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (Corporate Insolvency Resolution Process) शुरू करने की मंजूरी दी है।
क्यों फंसा रिलायंस होम फाइनेंस?
दिसंबर 2024 में RHFL ने ₹7.80 करोड़ का कर्ज और उस पर ब्याज चुकाने में चूक की, यह कर्ज एक इंटर-कॉर्पोरेट लोन सुविधा (Inter-Corporate Loan Facility) के तहत लिया गया था, शुरुआत 1 अप्रैल 2023 से हुई, जब रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस ने RHFL को ₹9.50 करोड़ की लिमिट दी थी, बाद में यह कर्ज ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और फिर इन्वेंट एसेट्स को ट्रांसफर कर दिया गया, जब RHFL ने कर्ज चुकाने में मोहलत मांगी तो इन्वेंट एसेट्स ने इनकार कर दिया और दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर दी।
शेयर मार्केट में हालात
RHFL का शेयर कभी ₹100 के पार ट्रेड हुआ करता था, फिलहाल यह penny stock बन चुका है और ₹5 से भी नीचे कारोबार कर रहा है, टेक्निकल चार्ट्स के हिसाब से इसमें ₹6.70 तक का short-term bounce संभव है, लेकिन मौलिक स्थिति (fundamentals) बहुत कमजोर है।
कंपनी का बिज़नेस मॉडल
रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड का मुख्य फोकस Home Loan और Affordable Housing Finance पर था। कंपनी का टारगेट मिडिल क्लास और लोअर इनकम ग्रुप के ग्राहक थे, टैगलाइन थी: “सस्ते में घर, आसान किस्तों में” लेकिन कर्ज का दबाव और कैश फ्लो की कमी ने बिज़नेस मॉडल बिगाड़ दिया।यह कंपनी कभी रिलायंस कैपिटल की अहम सहायक कंपनी मानी जाती थी।
निवेशकों के लिए चेतावनी
RHFL का शेयर अभी भी लो-फ्लोट और हाई-रिस्क कैटेगरी में आता है, कंपनी insolvency procedure से गुजर रही है, जिससे delisting, restructuring या बड़े haircut जैसे हालात बन सकते हैं, निवेशकों को सिर्फ ट्रेडिंग के नजरिए से ही देखना चाहिए, लंबी अवधि का निवेश बेहद जोखिमपूर्ण है।
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Nikki Kumar Sharma is an author at Bludo.in with more than 8 years of experience in finance and the stock market. B.Tech graduate in Computer Science, he combines strong analytical skills with deep market insights to deliver clear and practical financial content for readers. Passionate about learning every day and striving to do his best, Nikki focuses on simplifying complex stock market trends and investment strategies, making them accessible to both new and seasoned investors.

